Aug 23, 2017 · कविता

तुम हो तो..................

तुम हो
तो सब कुछ है
तुम हो
तो सपने हैं
तुम हो
तो बहुत से रिश्ते अपने हैं
तुम हो
तो सपनों के रंग अलग है
तुम हो
तो जीवन में उमंग अलग है ।
तुम हो
तो घर,
घर है
सिर्फ चार खड़ी दीवार नहीं
तुम हो
तो परिवार है
सिर्फ लोग नहीं ।
तुम हो
तो जीवन की डायरी भरी-भरी सी है
सिर्फ कोरे कागज नहीं
तुम हो
तो जीवन एक फुलवारी है
सिर्फ बंजर जमीन नहीं
तुम हो
तो जीवन है
सिर्फ उम्र नहीं
तुम हो
तो दिन है खुशी से जीने के
सिर्फ काटने के समय नहीं ।
‘तुम ही मेरे जीवन हो
तुम हो तो जीवन हो’
गर् तुम नहीं
तो कुछ भी नहीं
क्योंकि………..
तुम हो तो…………….

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दिमाग से इंजीनियर दिल से रचनाकार ! वस्तुतः मैं कोई रचनाकार नहीं हूँ, मैं एक...
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