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“तुम ही हो”

Archana Singh

Archana Singh

कविता

June 4, 2016

मेरे जीवन के सुरभित गीत का आगाज तुम ही हो।
मेरी धड़कन में बजते इन सुरों का साज तुम ही हो।
तुम्ही कविता बने मेरी तुम्ही मन भाव बन जागे,
मेरे स्वर से सजे हर गीत की आवाज तुम ही हो।

अर्चना सिंह?

Author
Archana Singh
मैं छंदबद्ध रचनाऐं मुख्यतः दोहा,कुण्डलिया और मुक्तक विधा में लिखती हूँ, मुझे प्रकृति व मानव मन में उमड़ते भावों पर लिखना पसंद है......
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