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तुम ही हो

Govind Kurmi

Govind Kurmi

कविता

December 7, 2016

मेरी तन्हाइयों का राज तुम हो ।
मेरा कल तुम हो मेरा आज तुम हो।

जब जब तुझको ढूंढा, पाया अपने दिल में ।
जालिम दुनिया ने मिलने ना दिया हमको भरी महफिल में ।

गलती मेरी ही होगी इसमें तेरी कोई खता नहीं ।
क्यों चाहा तुझको खुद से ज्यादा ये मुझको पता नहीं ।

वो डरकर जमाने से बोली की भुला दे मुझे ।
हर धड़कन में तू है क्या करें बता दे मुझे ।

Author
Govind Kurmi
गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।
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