तुम सब कुछ याद रखना

मैं भूल जाऊं तो चलेगा
तुम मत भूलना मेरे दोस्त
हमें कितने सितारे तोड़ने थे
हमें साथ में रोशनी के बुर्ज
तक जाना था
एक दूसरे के साथ
ताकि कहीं अंधेरा न रहे
न बाहर रहे न भीतर रहे
तुम मेरे बगैर,
एक नया काफ़िला तैयार करना
और घसीट लाना, रोशनी को
उन सब आंगनों में, बिखेर देना
जहां दरारे रहती हैं
आंखों में, हाथों में और दीवारों में भी
तुम याद रखना,
कि गुंडों का सल्तनत गिराना है
उनके पीछे का छायादार, सफेदपोश
लाल बत्ती वालों के मुँह पे थूकना है
ताकि वो अपना सड़ा सा मुँह और नाक
न घुसा पाए वहां जहां से
अन्याय पर न्याय की रोशनी फैलनी थी
तुम सब कुछ याद रखना …
तुम ये भी याद रखना कि मुझे
जिंदगी के गले में हांथ डाल झूमना था
आकंठ डूबना था जिंदगी में
जिंदगी के छाती पे तांडव करना था
अब तुम करना, मेरे हिस्से का भी तुम जी लेना
…सिद्धार्थ

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