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तुम वही हो

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

कविता

July 4, 2016

तुम वही हो ना,
जो अक्सर आकर मेरे कान में कुछ कहते हो,
मेरी तनहाइयों में कुछ गुनगुनाते हो,
जो मुझे ख्वाब देखने का बढ़ावा देते हो,
हाँ तुम वही तो हो,
जो अक्सर मेरी अंतरात्मा को झकझोरते हो,
मेरे मन के तारों को गुंजायमान करते हो,
मेरी भावनाओं को तरंगित करते हो
तुम वही हो ना,
जो चाहता है मैं संघर्ष करूँ,
जिसको हर पल हर लम्हा सोचूँ,
जो मेरी हर साँस खुद को ढूंढता है,
वही हो ना तुम,
जो मेरी यादों में रहना चाहते हो,
जो मेरी बातों में रहना चाहते हो,
जो मुझमे अपना अस्तित्व बनाना चाहता है,
तुम वही हो ना……..

“संदीप कुमार”

Author
सन्दीप कुमार 'भारतीय'
3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना" तथा "साझा संग्रह - शत हाइकुकार - साल शताब्दी" तीसरी पुस्तक तांका सदोका आधारित है "कलरव" | समय समय पर पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित होती... Read more
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