Mar 14, 2017 · कविता

तुम याद आ रही हो

तन्हाईयों में मेरे,
तुम दूर जा रही हो,
कैसे मैं कह दूँ कितना,
तुम याद आ रही हो।
जज्बात गए थम,
अब हुई आँखें नम,
इतना तो बता जाओ,
कब लौट आ रही हो।।
तन्हाईयों में मेरे,
तुम दूर जा रही हो,
कैसे मैं कह दूँ कितना,
तुम याद आ रही हो।।

दिल में है तेरे क्या,
मैं कैसे जान सकता,
तुम क्या सोचती हो,
तुम क्या चाहती हो।
चाहत तो मेरी मन्नत,
तू ही है मेरी जन्नत,
इसके सिवा ना मेरी,
कोई फरियाद आ रही हो।
तन्हाईयों में मेरे,
तुम दूर जा रही हो,
कैसे मैं कह दूँ कितना,
तुम याद आ रही हो।।

करता हूं सजदा रब से,
कहता नहीं मैं सबसे,
मेरी यादों के वो लम्हे,
ना तुझको सता रही हो।
फर्क नहीं है मुझ पर,
तू भूल जाये मुझको,
तूझे भूलना है तब जब,
मेरी आखिरी साँस आ चुकी हो।।
तन्हाईयों में मेरे,
तुम दूर जा रही हो,
कैसे मैं कह दूँ कितना,
तुम याद आ रही हो।।

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