तुम मेरी हो

तुम मेरी हो
// दिनेश एल० “जैहिंद”

हो-न-हो
पर तुम मेरी हो !
अच्छी हो या बुरी हो
पर तुम मेरी हो !!
दूर हो या पास हो
पर तुम मेरी हो !
यहाँ हो या वहाँ हो
पर तुम मेरी हो !
हो धरा पर या स्वर्ग में
पर तुम मेरी हो !!

तुम हो तो मैं हूँ
तेरे बिना मैं क्या हूँ !
जिसका मान नहीं अब
वही दम तोड़ती हया हूँ !!
मृदुल हो या क्रूर हो
पर तुम मेरी हो !
हो ना हो
पर तुम मेरी हो !
अच्छी हो या बुरी हो
पर तुम मेरी हो !!

तेरे बिना बे-सहारा मैं
तूफां संग चलके हारा मैं !
नहीं है मेरा ठौर-ठिकाना
कोई भाव नहीं आवारा मैं !!
सांवली हो या श्वेत हो
पर तुम मेरी हो !!
हो न हो
पर तुम मेरी हो !
अच्छी हो या बुरी हो
पर तुम मेरी हो !!

नहीं घर है नहीं ठिकाना
उड़ता हुआ मैं अनजाना !
बनके तूहीं मेरी प्रियतमा
होने दिया ना मुझे बेगाना !!
मित्र हो या बैरी हो
पर तुम मेरी हो !
हो न हो
पर तुम मेरी हो !
अच्छी हो या बुरी हो
पर तुम मेरी हो !!

ईश्वर से माँगा तुझको
तुझे रब ने दिया मुझको !
इतराया अपने भाग्य पर
धन्यवाद कैसे कहूँ रबको !!
मुझे चाहो या ना चाहो
पर तुम मेरी हो !!
हो न हो
पर तुम मेरी हो !
अच्छी हो या बुरी हो
पर तुम मेरी हो !!

हाँ….
तुम मेरी हो !
तुम मेरी हो ||

====*******====
दिनेश एल० “जैहिंद”
04. 07. 2018

Sahityapedia Publishing
Like Comment 0
Views 2

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share

Do you want to publish your book?

Sahityapedia's Book Publishing Package only in ₹ 9,990/-

  • Premium Quality
  • 50 Author copies
  • Sale on Amazon, Flipkart etc.
  • Monthly royalty payments

Click this link to know more- https://publish.sahityapedia.com/pricing

Whatsapp or call us at 9618066119
(Monday to Saturday, 9 AM to 9 PM)

*This is a limited time offer. GST extra.