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तुम मेरी सखी हो

डॉ मधु त्रिवेदी

डॉ मधु त्रिवेदी

कविता

September 3, 2016

तुम मेरी सखी हो

सखी हो या सनेही
तुम जो भी हो
मेरी छाया हो
क्योंकि
तुम मेरी सखी हो

मेरे सोते जागते
उठते बैठते
साथ मेरे रहती हो
क्योंकि
तुम मेरी सखी हो

मेरे अनतरंग के साथी
सुख दुख के सारथी
तुम मेरी प्रतिमूर्ति
क्योंकि
तुम मेरी सखी हो

दुख दरद का व्यापार
सब तेरे ही हाथ
शान्त सुकोमल कल्पना
क्योंकि
तुम मेरी सखी हो

मेरे अध अंग की सारथी
दुखद भावों की हारणी
हृदय मंदिर की बासिनी
क्योंकि
तुम मेरी सखी हो

मेरी प्रिया से गुरुतर तुम
बिन माँगे दे देती
मित्रता की तुम आन
क्योंकि
तुम मेरी सखी हो

Author
डॉ मधु त्रिवेदी
डॉ मधु त्रिवेदी प्राचार्या शान्ति निकेतन कालेज आगरा स्वर्गविभा आन लाइन पत्रिका अटूट बन्धन आफ लाइन पत्रिका झकास डॉट काम जय विजय साहित्य पीडिया होप्स आन लाइन पत्रिका हिलव्यू (जयपुर )सान्ध्य दैनिक (भोपाल ) सच हौसला अखबार लोकजंग एवं ट्र... Read more
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