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“तुम, मुझे याद करके देखना”

Santosh Barmaiya

Santosh Barmaiya

गज़ल/गीतिका

March 7, 2017

बिछड़ी हुई गलियों से, आज फिर गुजर के देखना।
तन्हा ना कहोगे खुदको,आज फिर संवर के देखना।।
हर कदम निशा मिलेंगे मेरे,नज़र साद करके देखना।
पास पाओगे मुझे, ख़ुदा से फरियाद करके देखना।।
तस्वीर मेरी लेकर तुम, बंद कमरे में बैठ जाना।
तस्वीर बात करेगी तुमसे, तुम बात करके देखना।।
रूठते थे हमसे तुम कभी, मनाते थे हम कभी।
आज मनाएगी तस्वीर तुम्हें, तुम रूठ करके देखना।।
खो जाओगे ख्यालो में तुम, तभी हम दस्तक देंगे।
दिल में पाओगे हमें, तुम दिल बेकरार करके
देखना।।
तमाम अधूरे किस्से, बन जाएँगे याद के हिस्से।
बस एक बार तुम, मुझे, याद कर के देखना।।
रचियता
संतोष बरमैया”जय”
09923361761,08889245672

Author
Santosh Barmaiya
मेरा नाम- संतोष बरमैया"जय", पिताजी - श्री कौशल किशोर बरमैया, ग्राम- कोदाझिरी,कुरई, सिवनी,म.प्र. का मूल निवासी हूँ। शिक्षा-बी.एस.सी.,एम ए, डी.ऐड,। पद- अध्यापक । साझा काव्य संग्रह - 1.गुलजार ,2.मधुबन, 3.साहित्य उदय,( प्रकाशाधीन ), पत्रिका मछुआ संदेश, तथा वर्तमान मे साहित्य-नवभारत... Read more
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