“तुम, मुझे याद करके देखना”

बिछड़ी हुई गलियों से, आज फिर गुजर के देखना।
तन्हा ना कहोगे खुदको,आज फिर संवर के देखना।।
हर कदम निशा मिलेंगे मेरे,नज़र साद करके देखना।
पास पाओगे मुझे, ख़ुदा से फरियाद करके देखना।।
तस्वीर मेरी लेकर तुम, बंद कमरे में बैठ जाना।
तस्वीर बात करेगी तुमसे, तुम बात करके देखना।।
रूठते थे हमसे तुम कभी, मनाते थे हम कभी।
आज मनाएगी तस्वीर तुम्हें, तुम रूठ करके देखना।।
खो जाओगे ख्यालो में तुम, तभी हम दस्तक देंगे।
दिल में पाओगे हमें, तुम दिल बेकरार करके
देखना।।
तमाम अधूरे किस्से, बन जाएँगे याद के हिस्से।
बस एक बार तुम, मुझे, याद कर के देखना।।
रचियता
संतोष बरमैया”जय”
09923361761,08889245672

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रचनाकार- संतोष बरमैया"जय", पिताश्री - श्री कौशल किशोर बरमैया, कोदाझिरी,कुरई, सिवनी,म.प्र.। शिक्षा-बी.एस.सी.,एम ए, डी.ऐड,। पद-... View full profile
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