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तुम बिन कब तक रहूँ अधूरी

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

कविता

March 1, 2017

जब से गये हो तुम मेरे सजना
याद नहीं दिन रात महीना

दिन सूना है, रात है सूनी
दिल की हर एक बात है सूनी

बिंदियाँ रूठी, रूठे कंगना
भूल गई अब सजना-संवरना

नैना तेरे दरस को तरसे
आँखे मेरी हरदम बरसे

आकर मेरी प्यास बुझा दो
मिलने की कुछ आस बंधा दो

आ भी जाओ अब तो सजना
मुश्किल हो गया तुम बिन जीना

अब न सही जाये ये दूरी
तुम बिन कब तक रहूँ अधूरी

तुम बिन कब तक रहूँ अधूरी????

************************
लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’
भोपाल
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Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....
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