मुक्तक · Reading time: 1 minute

तुम जीत भी सकती थीं

तुम जीत भी सकती थीं,
जीत से बहुत कम
फासले पर
तुमने हार लिखी,
प्रतियोगियों की भाषा में इसे
अच्छी हार कहते हैं
एक ऐसी हार
जो हार होकर भी
शर्मनाक न हो।
लेकिन ये फासला
सिर्फ तुम्हें तय न करना था
अगर सिर्फ तुम्हें तय करना होता
तो शायद जीत जाती तुम
पर ये फासला हमें तय करना था/है
अकेले तुमने आखिरी घडियों में
अपना हौसला नही खोया
क्योंकि तुम पर असर
उस घडी का भी था
जब तुम्हारे स्कूल में
तुम्हारे जज्बे को
बढाने वाले
दो चार थे और
हतोत्साहित करने वाले अनेक..
हमें तय करना है ये फासला
जो दो चार से कुछ ज्यादा हो।
तुम अकेले ही फोकस न कर पाईं
उस गेंद उस पल पर
फोकस वो भी न थे
जिन्हे रखना था ध्यान
तुम्हारी डाइट ,तुम्हारे स्टेमिना का
हमें तय करना है वो फासला
जो तुम्हारे खेल से
तुम्हारी डाइट तक भी जाता हो
अकेले तुम नही हारी हो
विमेन ब्रिगेड
तुम्हारे साथ
हारा है हर वो पल
जो तुम्हे कुछ और बेहतर
और बेहतर दे सकता था
समझने की जरूरत
सिर्फ तुम्हें नहीं है
हमें भी है
जो तय कर सकते थे
कोई फासला
और शायद तुम होती
जीत के और करीब
तुम जीत भी सकती थीं

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