तुम और मैं

तुम थे कहीं या तुम थे यहीं,
भूला नही मैं,जब तुम थे वहीं,
तुम तराशे गए,मैं बिखरता गया,
पर मैं था जहाँ, आज भी हूँ वहीं ।

तुम तटों पर थे,मैं दरिया में था,
तुम तैर गये ,मैं डूब गया,
तुम्हें मिला सहारा,मुझे झंझावात,
मैं था सही या तुम थे सही।

आवाज़ दिया पर रुके नही तुम ,
मुड़कर देखा एकबार नही,
लौटकर आओगे तुम एक दिन,
इंतजार में हूँ मैं, आज भी वहीं ।
@TheChaand.

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 207

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share