तुम और मैं

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तू शिव है,
तेरी शक्ति हूँ मैं।
तेरी जीवन की,
हर एक भक्ति हूँ मैं।
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तेरे अंग में समायी,
तेरी अर्धांगिनी हूँ मैं।
तेरे संग-संग चलूँ,
तेरी संगनी हूँ मैं।
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तू कान्हा है,
तेरी राधा हूँ मैं।
तोड़े ना टूटे,
ऐसी प्रेम धागा हूँ मैं।
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तू बदरा है,
तेरी बिजुरी हूँ मैं।
अधरों से लिपटी,
तेरी बाँसुरी हूँ मैं।
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तू दिल है,
तेरी धड़कन हूँ मैं।
तन-मन से तुम पर,
समर्पण हूँ मैं।
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तू सूरज है,
तेरी रोशनी हूँ मैं।
तू चाँद है,
तेरी चाँदनी हूँ मैं।
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तू सीप है,
तेरी मोती हूँ मै।
तेरा नैनों में बसी,
तेरी ज्योति हूँ मैं।
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तू दिया है,
तेरी बाती हूँ मैं।
संग-संग जलूँ,
एसी साथी हूँ मैं।
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तू मीत है,
तेरी प्रीत हूँ मैं।
तू गृहस्वामी है,
तेरी लक्ष्मी हूँ मैं।
????-लक्ष्मी सिंह ??

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