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तुम आओ (डॉ. विवेक कुमार)

Dr. Vivek Kumar

Dr. Vivek Kumar

कविता

June 9, 2017

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है नदियाँ सागर की लहरों में
समा जाने के लिए।

तुम आओ इस तरह
आती है जैसे बेचैन व्यक्ति को
किसी की दुआओं के असर से करार।

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है
घटाटोप अँधेरी रात के बाद संभावनाओं कि नई सुबह।

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है
किसी की स्मृतियों की खुशबू
मन प्राण को उत्फुल्ल करने के लिए।

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है माँ की लोरी से
मुन्ने की पलकों में मीठी नींद की झपकियाँ।

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है
वर्षों बाद किसी आत्मीय के आगमन पर अनिवर्चनीय खुशी।

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है
फूलों की खुशबू से लबरेज हवा।

प्रतीक्षा में हूँ मैं
सदियों से तुम्हारे आने की…।

तेली पाड़ा मार्ग, दुमका, झारखंड।
(सर्वाधिकार सुरक्षित)

Author
Dr. Vivek Kumar
नाम : डॉ0 विवेक कुमार शैक्षणिक योग्यता : एम0 ए0 द्वय हिंदी, अर्थशास्त्र, बी0 एड0 हिंदी, पी-एच0 डी0 हिंदी, पीजीडीआऱडी, एडीसीए, यूजीसी नेट। उपलब्धियाँ : कादम्बिनी, अपूर्व्या, बालहंस, चंपक, गुलशन, काव्य-गंगा, हिंदी विद्यापीठ पत्रिका, जर्जर-कश्ती, खनन भारती, पंजाबी-संस्कृति, विवरण पत्रिका,... Read more
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