May 19, 2020 · कविता
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तुम्हारे सीने में मुंह छुपा लूं

जी करता है
तुम्हारे सीने में मुंह छुपा लूं
दुनिया से नजरें चुरा लूं
और फिर मैं कुछ ना बोलूं
बस ये आंखें फिर ना खोलूं
धीरे से तुम बातें कर लो
कुछ अनकहा सा मेरा पढ़ लो
इक प्यारा अहसास हो तुम
दिल का इक जज़बात हो तुम
पता है मुझ को सपना है ये
पर मेरा अपना है ये
ये सपना मैं रोज जिऊंगी
ये नशा मैं रोज़ पिऊंगी
ये नशा मैं रोज़ पिऊंगी।

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Monika Sharma
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