कविता · Reading time: 1 minute

तुम्हारे बिन कयामत

एक नई गजल

हमारी जाँ पे आफत हो रही है,
तुम्हारे बिन क़यामत हो रही है।।

तुम्हारी ख़ामुशी से आज देखो,
मुहब्बत की जलालत हो रही है।।

हुई बेहाल साँसे जिंदगी की,
सुकूँ से भी बगावत हो रही है।।

नही है हुस्न पे इलजाम कोई,
फ़क़त आशिक़ की जिल्लत हो रही है।।

वफ़ा ईमान की कीमत नही है,
मुहब्बत अब तिज़ारत हो रही है।।

78 Views
Like
13 Posts · 1.2k Views
You may also like:
Loading...