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तुम्हारे खत……. कविता कमंडल काव्य संग्रह से मेरी दूसरी रचना

Shikha Shyam Rana

Shikha Shyam Rana

कविता

June 24, 2016

एक दिन
तुम्हारे लिखे
वो सारे खत
सार्वजनिक कर
लाऊंगी दुनिया के सामने
उस दिन पता चल जायेगा
तुम्हारे उन अपनों को
जिन्हें लगता है आज
कि हम ढोह रहे है अपने रिश्ते को
कितना प्यार है
हमारी रिश्तों की जड़ों में
जो हमे एक दूसरे से
दूर
होने ही नही देता
तुम्हारी खुशबू से सरोबोर
आज भी
खोलती हूँ जब कभी तुम्हारे खत
तो वो मुझे अंदर तक भीगो जाते है
और तुम्हारे गहरे प्यार का अहसास
बरस पड़ता है मुझ पर
सावन की पहली फुहार सा
न जाने वो कैसा वक़्त था
जब घटाएं छाती थी आसमान पर
मन तुम से दूरी होने का
शोक मनाता उदास हो उठता था
तुम कभी तेज़ तूफान में
आ कर खड़े हो जाते थे
मेरे कमरे की खिड़की से नजर आते
उस आम के पेड़ के नीचे
दूर ….
हम निहारा करते
एक दूसरे को घंटो
तुम भीगते रहते बारीश मे
और मे भीगती रहती तुम्हारे कोमल प्यार मे
न जाने वो कौन सा वक़्त था
जब तुम मेरे लिए पत्थर हो गये
पर मैं जानती हूँ
जो अंगारे बरसते है आज
शब्द बन कर
उन के नीचे
तलहटी में कही
एक नदी बहती है
जो तुम कहते नही
वो मुझ से छुपा कर रखी
तुम्हारी डायरी बताती है
जिस का हर पन्ना
मेरे नाम लिखा एक खत है
तभी तो कहती हूँ
किसी दिन तुम्हारी नज़र बचा
सार्वजनिक कर दूंगी
तुम्हारे प्रेम में भीगे खत
उस दिन तुम अपनी भावनाओं का बांध
बचा पाये तो कहना

शिखा श्याम राणा
पंचकूला हरियाणा॥

Author
Shikha Shyam Rana
हिंदी कविता कहानियाँ लिखने का जनून की हद तक शौक तो है मगर अभी छात्रा हूँ इस क्षेत्र में। जॉब और शौक एक ही, हरियाणा ग्रंथ अकादमी में कार्यरत।
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