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तुम्हारी याद को दिल से लगाये फिरते हैं

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

November 11, 2017

तुम्हारी याद को दिल से लगाये फिरते हैं
भरे भरे से ये नैना छिपाये फिरते है

हरी भरी सी धरा को धुऐं ने है घेरा
मगर ये आग भी हम ही लगाये फिरते हैं

लिखी हैं ठोकरें ही ठोकरें मुकद्दर में
लिये ये दर्द भी हम मुस्कुराये फिरते हैं

ये लोग जलते हमारी ही कामयाबी से
तभी जुबान से नश्तर चुभाये फिरते हैं

असर हुआ है मुहब्बत का कुछ अधिक गहरा
जो रूप मजनुओं सा वो बनाये फिरते हैं

जरा सा काम हमारे यहाँ वो क्या आये
उसी का देखिये अब गान गाये फिरते है

घमंड ‘अर्चना’ उनको बड़ा है दौलत का
उसी की शान सभी को दिखाये फिरते हैं

डॉ अर्चना गुप्ता
11-11-2017

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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