Skip to content

तुम्हारी कमी खलती नहीं

Shanky Bhatia

Shanky Bhatia

कविता

December 8, 2016

बेशक नजरों को तुम दिखती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

तुम्हारी नज़रों से अब हमारी नज़रें मिलती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

हमारी मुस्कान भी तुम बिन खिलती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

अब कोई प्यार की ज्योत तुम्हारे दिल में जलती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

तुम्हारी बेवफाई में भी शायद तुम्हारी कोई गलती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

अब कोई अप्सरा हाथ में हाथ लिए साथ मेरे चलती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

ऐसा अँधियारा छाया कि सूरत अब बदलती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

तुम्हारे सुंदर होठों से अब प्यार की गंगा निकलती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

ये गहरी अंधियारी रात भी तो तुम्हारे बिन ढलती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

अब कोई भी ख्वाहिश इस दिल में पलती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

ये मुश्किल घडी टाले से भी टलती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

उखड़ने लगती हैं साँसें भी अब सम्भलती नहीं,
पर तुम्हारी कमी खलती नहीं।

किसी भी सूरत, दिल से तुम निकलती नहीं,
इसलिए तुम्हारी कमी खलती नहीं।

इसलिए तुम्हारी कमी खलती नहीं।

————-शैंकी भाटिया
7 दिसम्बर, 2016

Share this:
Author
Shanky Bhatia

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you