गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

तुम्हारा प्यार पाना चाहता है

गजल
बह्र-1222 1222 122
काफिया-आना रदीफ़-चाहता है
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तुम्हारा प्यार पाना चाहता है
खफा दिल मुस्कुराना चाहता है

बहारों के शहर में गमजदा दिल
खिजाँ में गुनगुनाना चाहता है

बुरे इस दौर का है आदमी जो
फकत दौलत कमाना चाहता है

किताबों से दबा मासूम बचपन
घरौंदे फिर बनाना चाहता है

मिटाता है धरा की रुत सुहानी
फलक पर आशियाना चाहता है

चलो रोकें उसे जो इस जहाँ में
अदावत को बढ़ाना चाहता है।

डॉ. दिनेश चन्द्र भट्ट,गौचर(चमोली)उत्तराखण्ड

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