Jul 21, 2016 · मुक्तक
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तुमसे मिलु मैं कुछ इस तरह…

तुमसे मिलु मैं कुछ इस तरह, की कोई मुझे आवाज़ ना दे,
घुल जाउ तुममे इस कदर, की धड़कने मेरा साथ ना दे
कह जाउ तुमसे इस तरह, की कोई सुन भी ना पाये,
आंखे बयाँ करें और जुबां जज़्बात ना दे.

– © नीरज चौहान

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Neeraj Chauhan
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कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के... View full profile
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