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तुमसे बिछड़ के दिल को ठिकाना नहीं मिला

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

July 23, 2016

तुमसे बिछड़ के दिल को ठिकाना नहीं मिला
तुम सा कहीं भी हमको दीवाना नहीं मिला

सपनें रहे अधूरे गिला ये रहा हमें
वो चाहतों का तुमसे खज़ाना नहीं मिला

कुछ याद ही कहाँ हैं सनम प्यार में हमें
तुमको भुला सकें वो बहाना नहीं मिला

ऐसी तरंग छेड़े ,न फिर होश ही रहे
मनमीत का मधुर वो तराना नहीं मिला

हो एक घर हमारा भी ख्वाहिश यही रही
ढूंढा यहाँ मगर वो घराना नहीं मिला

इक बार दिल तुम्हारे गए बस तो फिर हमें
सारे जहाँ में ऐसा ठिकाना नहीं मिला

पल जी लिए वही जो चले साथ अर्चना
फिर बाद में सफर वो सुहाना नहीं मिला

डॉ अर्चना गुप्ता

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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