तुझे याद रखा है मैंने ............( ग़ज़ल )

हर ख़ुशी हर एक गम में, तुझे याद रखा है मैंने !
तेरी यादो का गुलशन, सदा आबाद रखा है मैंने !!

जरुरी नहीं कि वफ़ा के बदले वफ़ा हो हासिल, !
वादा वफ़ा निभाने का अपना याद रखा है मैंने !!

हर एक खौफ से डरना, अब छोड़ दिया है मैंने !
तेरे जाने के बाद, खुद को आबाद रखा है मैंने !!

शुक्र मानो की तुम्हे अभी तक नकारा नही दिल ने !
साँसों में शालिम आज भी आजाद रखा है मैंने !!

नजरे झुका लेना फकत इलाज़ नही भुला देने का !
तुझे खुदा से की गयी पहली फ़रियाद रखा है मैंने !!

चन्द लफ्ज़ कहे थे तुमने “धर्म” की शान में कभी !
उस पाक नेमत को समझ के जायदाद रखा है मैंने !!
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डी. के. निवातियाँ ______________@

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