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इज़्ज़त उन्हें बख्शिश कर।।

है इल्तिजा बस इतनी सी, गर ये तुझको कबूल हो,
तो माफ करना मेरी गलती, जो कहि से भूल हो।
हो भविष्य तेरा सफल, बर्तमान उनका सशक्त हो,
हर शूल को जो झेलते, की राहो में सबके फूल हो।।

न चाह कोई खास से, न है शौख कोई रईश कर,
ले लगा अपने गले तू, इज़्ज़त उन्हें बख्शिश कर।।

तू खौफ़ न खा बेवजह, हरपल मैं तेरे साथ हुँ,
तू तो रूह मेरे देश की, मैं सिर्फ नश्वर गात हुँ।
है ये शपथ हम ले चुके, बस तेरी रक्षा यूँ ही करें,
हो सुरक्षित तेरा भविष्य, मैं गुम सा गुजरा रात हुँ।।

हो दुवा सर मेरे तेरा, रहे साथ शुभ आशिष कर।
ले लगा अपने गले तू, इज़्ज़त उन्हें बख्शिश कर।।

जय हिंद वन्देमातरम, जयकारा क्यो यदाकदा,
भूल जाते विजय दिवस, रखे याद वैलेंटाइन सदा।
जय जवान जय किसान, से जवान यूँ ग़ुम हो गया,
मर रहे किसान भी, जो निरीह से बचे ख़ौफ़ज़दा।।

है ये भी तो हिस्सा तेरा, बस बात ये तफ्तीश कर,
ले लगा अपने गले तू, इज़्ज़त उन्हें बख्शिश कर।।

वो पुष्प की अभिलाषा भी, आज बेदम मर रहा,
तोड़ कर माली उसे, चरणों मे किसी के धर रहा।
पर फर्क ना कोई हमे, ना फक्र अपनी ‘फौज’ पे,
रक्षार्थ मातृभूमि खातिर, जन्म सफल जो कर रहा।।

अरे कौन है ये तेरे, इन्हें जानने की कोशिश कर,
ले लगा अपने गले तू, इज़्ज़त उन्हें बख्शिश कर।।

“चिद्रूप”पेट हो जिसका भरा, भूखे की उसको क्या खबर,
जिसे असंख्य अकारण मिले, उसपे अभावो का क्या असर।
हे भाग्य बिधाता दे ज्ञान उनको, जो सिर्फ यही कमतर रक्खे,
जो जानते निज स्वार्थ ही, उसे जलते चिराग की क्या कदर।।

छोड़ वो चकाचौध रोशनी, निज गर्व को महसूस कर,
ले लगा अपने गले तू, इज़्ज़त उन्हें बख्शिश कर।।

©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित २१/१०/२०१८ )

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पाण्डेय चिदानन्द
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
रेवतीपुर, देविस्थान
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-:- हो जग में यशस्वी नाम मेरा, है नही ये कामना, कर प्रशस्त हर विकट...
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