तीर्थ राज प्रयाग

जप तप साधन यज्ञ हवन, त्रिवेणी स्नान
गंगा जमुना सरस्वती तट, तीरथ राज महान
साधु संत गृहस्थ सब, करें प्रयाग प्रयाण
कल्पवास सत्संग साधना, मिलन प्रभु का ध्यान
युगों युगों से चल रहा, रामकथा का गान
दुनिया का मेला बड़ा, तीरथराज प्रयाग
सुर मुनि किन्नर नाग नर, करें तपस्या जाग
दृश्य अलौकिक देखकर, जाग जाए बैराग
माघ मास अर्ध कुंभ की, शोभा कहीं न जाए
पूर्ण कुंभ की महिमा को, कौन कवि कह पाए
टेंट तंबुओं का नगर, बसता बड़ा विराट
महीनों भी पैदल चलें, देख न पायें ठाठ
पुण्यभूमि प्रयाग की, बारंबार प्रणाम
बड़े भाग से मिल सके, संगम पर स्नान

सुरेश कुमार चतुर्वेदी

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