तीन मंत्र सफल जीवन के

तीन मंत्र सफल जीवन के
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शिक्षित बनिए एक तो,रहो संगठित दूज।
करो संघर्ष ख़ूब तुम,जीवन हो महफ़ूज़।।
जीवन हो महफ़ूज़,बढ़ो तुम और बढ़ाओ।
शुरू कारवां आज,इसे आगे ले जाओ।
बोलो जय-जय भीम,खुदी को करिए रक्षित।
बाबा साहिब मंत्र,तीन देते हो शिक्षित।

पूजा छोड़ो मूर्ति की,त्याग अंधविश्वास।
सक्षम बनिए एक बस,होगा तभी विकास।।
होगा तभी विकास,और नहीं यहाँ चारा।
लिख संविधान सोच,दिया है नेक सहारा।
आत्मकथा है एक,उदाहरण-सा सहेजा।
पढ़कर लेना सीख,करो पुस्तक की पूजा।

खुद को कह कमज़ोर भी,गाली खुद को आज।
छुआछूत के दौर में,जिया भीम अंदाज़।।
जिया भीम अंदाज़,बना समाज का सहारा।
तूफ़ान रूख मोड़,किया है भला हमारा।
कहूँ मसीहा एक,हुआ नहीं जी अवरुद्ध।
कोई ना दे साथ,मनुज ताक़त खुद की खुद।

महा-पुरुष में भेद क्यों,सबका होता एक।
सभी करो रे मान जी,यही समय की टेक।।
यही समय की टेक,प्रेरणा लें हम सारे।
उड़ें एकता पंख,मानवता को निखारे।
बने भारत महान,मैंने दिल से है कहा।
अपनाओ तुम आज,कहलाओ मानव महा।

मना जन्मतिथि एक दिन,कैसे उतरें पार।
हरदिन करके याद तुम,सीख हरो उपहार।।
सीख हरो उपहार,समय का यही तक़ाजा।
तभी खुलेगा देख,उजालों का दरवाज़ा।
क़सम उठाओ आज,खुद को लो अब तुम तना।
भरके पूरा जोश,जयंती लो यार मना।

बाबा तेरे नाम पे,राजनीति है आज।
पर समझे ना देखिए,तेरा खुदी समाज।।
तेरा खुदी समाज,अचरज मुझे है होता।
बटा हुआ है आज,देखके मन है रोता।
सुन प्रीतम की बात,जाओ काशी न काबा।
अंबेडकर-से मीत,बनिए कह गए बाबा।

आर.एस.बी.प्रीतम
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