दोहे · Reading time: 1 minute

तीन दोहे .. नयन नयन डूबे सहज, नयन नयन नह-लाय l

नयन नयन डूबे सहज, नयन नयन नह-लाय l
नव नयन निर्मला भये, नेह नयन कह-लाय ll

मानव की मन में महक, मानवता दे मान l
मानवता मन में मरे, मिटता मानव मान ll

तरासा तू नहीं तरस , सभी को ले तरास l
ख़ासम ख़ास बना रहा, ओरों को कर ख़ास ll

अरविन्द व्यास “प्यास”

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