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**** तिलिस्म जिंदगी का। ****

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

January 11, 2017

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तिलिस्म जिंदगी का भी कितना अजीब है

कैच जिंदगी को करने मौत बाउंड्री पर खड़ी है

जिंदगी और मौत के दरमियां इतना फासला है

जैसे कब्बडी में लाईन छूते ही मौत से
जिंदगी है ।।

?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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