कविता · Reading time: 2 minutes

*** ” तिरंगा प्यारा…….!!! ” ***🇳🇪🇳🇪🇳🇪

** तीन रंग का मैं , तिरंगा प्यारा ;
लोगों के अरमान हूँ मैं ,
भारत की शान हूँ मैं ।
आजादी की अंगड़ाई लेकर ;
ऊँचे आसमान पर , मैं लहराता ।
गुलामी की जंजीर तोड़कर ;
न्यारे नभ पर , मैं मदमाता ।
तीन रंग का मैं , तिरंगा प्यारा ;
आसमान में इठलाना ,
है मुझको प्यारा ।

** श्वेत रंग लाती उजियारा ;
शाँति-सद्भाव और देश प्रेम का संदेश दे जाता ।
हरा रंग है हरियाली न्यारा ,
तन-मन में , स्नेह प्यार का अप्रतिम रस बरसाता ।
केसरिया है रंग प्यारा ,
पावन धरा का , है राज दुलारा ;
जन-मन में नव उमंग जगाता ,
और अविरल भाव से तरंग लाता ।
युवाओं में ,
एक नई शक्ति का रक्त संचार बढ़ता ।
तीन रंग का मैं , तिरंगा प्यारा ;
आसमान में इठलाना है , मुझको प्यारा ।
मध्य हृदय में चक्र बसा है ,
प्रगति का देता संदेश ।
सतत् क्रांति-विकास पथ की ,
आसमान में गति बढ़ाता ।
रंग-बिरंग और असमानता पर भी ,
एकता का संदेश दे जाता ।
ऊँच-नीच की त्याग भाव से ;
असीम नील गगन में , हरदम इठलाता ।
तीन रंग का मैं , तिरंगा प्यारा ;
आसमान में इठलाना , है मुझको प्यारा ।

** दुश्मनों के अरमान कूचकर ,
राष्ट्र-द्रोहियों के विचार भेदता ।
क्या बच्चा…? , क्या बूढ़ा…..? ;
क्या युवा ….? , क्या युवती …..?
हर मन में एक तरंग ,
हर तन में नव-उर्जित उमंग ;
और रक्त प्रवाह में अविरल जोश बढ़ता।
मैं सतत् हूँ , अनवरत् हूँ ;
सर्व-शक्ति जैसा प्रबल हूँ ।
तीन रंग का मैं , तिरंगा प्यारा ;
लोगों के अरमान हूँ मैं ।
भारत माँ की अभिमान हूँ मैं ,
हिन्दुस्तान की अमिट शान हूँ मैं ।।

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बी पी पटेल
बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ )
१४/०८/२०२०

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