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तितली …सुशील यादव

sushil yadav

sushil yadav

कविता

January 13, 2017

ऐसी तितली वैसी तितली
जाने कैसी-कैसी तितली
–फूल-फूल का रस लेती
–पत्ते आराम से बैठी तितली
कभी-कभी बारिश हो जाती
कुछ बुँदे, पर-पैर भिगाती
–गीले फूलों कुछ खींच न पाती
–मन-मसोस रहती तितली
कुछ दिन से बाग़ न आती
फूल-रस ना पराग उठाती
—बात-बात पर गुस्सा हो जाती
—मैंने देखी एक अनमनी तितली
अद्भुत तितली संसार सुहाना
छीट-रंग का बेमोल खजाना
—तितली अपना वजन रखे न
—हल्की-फुल्की होती तितली
सुशील यादव

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sushil yadav
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