कविता · Reading time: 1 minute

तितली बोली जुगनू राजा पास मुझे आ जाने दो

तितली बोली जुगनू राजा पास मुझे आ जाने दो !
भटक गयी हू पथ से अपने ज़रा उजाला आने दो !!

कैद किया था कुछ बच्चों ने मुझको अपने हाथों में !
किसी तरह से जान बचाकर आई काली रातों में !!

जुगनू बोला तितली रानी… कहो कहा तक पहुचाऊ !
साथ चलो अब उड़ो गगन में राह तुम्हे मै दिखलाऊ !!

हुआ सवेरा सूरज दादा से डर कर खो जाता हू !
मिले अँधेरा कही अगर तो वही बैठ सो जाता हू !!

रंग बिरंगी तितली रानी सबके मन को भाती हो !
नन्हे मुन्हे बच्चों के हाथों में क्यों नहीं आती हो ?

तितली बोली जुगनू राजा रात में टिम टिम करते हो !
कभी किसी का बुरा न चाहा फिर क्यों दिन में डरते हो !!

डरने की कोई बात नहीं जी बड़ो का आदर करता हू !
पहचान नहीं जो सक्ते दिन में बस उनसे ही डरता हू !!

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