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तितली की झुंड मेरे मन को लुभा गई

Pritam Rathaur

Pritam Rathaur

गज़ल/गीतिका

April 20, 2017

मौसम बसंती आया हरियाली छा गई
दुलहन बनी जमीं है सिंगार पा गई

ठूंठे सभी शज़र थे बीमार जैसे थे
चेहरा खिला खिला है रौनक़ सी आ गई

अब वो कली हमल में पर्दा नसीं थी जो
कुदरत ने हाथ फेरा जान उसमे आ गई

होकर सयानी वो कली मदमस्त हो गई
भौंरे दिवाने कहते क़यामत है ढा गई

नग्में सुना रही है कोयल भी मस्ती में
तितली की झुंड मेरे मन को लुभा गई

छाई बहार हर सूं बहका हुआ समां
,”प्रीतम” सभी दिलों में खुशहाली आ गई

Author
Pritam Rathaur
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है... Read more
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