बाल कविता · Reading time: 1 minute

तितलियाँ

शहर में बगीचे मिलते ,
जंगल बगीचे पेड़,
और चिड़िया !
नहीं मिलते ,
सुबह शाम ,
फूलों पर ,
निद्धन्द विचरण करती ,
तितलियां वगैरह ,
जो नहीं होता हमारे पास ,
सहेजते हैं उसे ही हम ,
शहरों के घरों के ड्राइंगरूम में ,
भरे पड़े हैं इन्हीं सबकी ,
तस्वीरों मुखौटों ,
अनुकृतियो से ,
कितना कुछ कम है शहर में ,
शहर के आदमी के पास !

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