" ताज़पोशी है , गुलाबों की "

खुशनुमा पल ,
खुश है मौसम !
झूमती हैं बहारें ,
तरबतर हर क्षण !
नज़ाकत पल रही –
नवाबों सी !!

राज़ आँखों में ,
अब गहरे गहरे !
निगरानिया ज्यादा ,
बढ़ गये पहरे !
उम्मीदें सब रखें –
ज़वाबों की !!

बोल अधरों के ,
हैं अधर धरे !
प्रतीक्षा कर रही ,
पलक ठहरे ठहरे !
मीठी सी छुअन –
है ख़्वाबों की !!

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