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तास के पत्ते

धरती ढीली हो,
माटी गीली हो
सांस लेने निकल आते,
जमीन मे छुपे
साँप, बिच्छू, कुकर्मुत्ते
लगा लगा छत्ते ।

धरती कड़ी हो,
दरारें भी पड़ी हों
तब नहीं निकलते
जहर नहीं उगलते
साँप, बिच्छू और
भौकते कुत्ते ।

बरसाती मेंढ़क नहीं ये
कहीं नहीं लगते हैं वे
ये बरसते हैं घ्रणा-द्वेष
दिखते हैं शुभ्र भेष
बादशाह, बेगम, गुलाम
तास के पत्ते ।

लक्ष्मी नारायण गुप्त

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Laxminarayan Gupta
Laxminarayan Gupta
ग्वालियर ( म. प्र.)
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मूलतः ग्वालियर का होने के कारण सम्पूर्ण शिक्षा वहीँ हुई| लेखापरीक्षा अधिकारी के पद से...