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तासीर शब्दों की

तासीर शब्दों की कभी नरम
तो कभी गरम होती है ।
कभी फूलों सी नरम
कभी लौहे की जंजीर होती है ।
फरक बस इतना है
नरमी इबादत की
गरमी बगावत की होती है ।
वरना क्या वजह है
एक शब्द सीतलता दे
और एक शब्द दिल मे चुभन ।।

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Ashutosh Jadaun
Ashutosh Jadaun
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स्वागत हैं मेरे जज्बात साज़ गीतों में. कभी जब मैं यूँ ही तन्हा बैठता हूँ...