ताज

करुं वंदना हर घड़ी, सीरत के सिर ताज
महफिल की सिरमौर हो, शब्दों पर हो राज
शीला गहलावत सीरत
चण्डीगढ़, हरियाणा

3 Likes · 13 Views
सपने देखना कैसे छोड़ दूं सजाये अरमान कैसे तोड़ दूं हिन्दी, हरियाणवी में ग़ज़ल, गीत,...
You may also like: