कविता · Reading time: 1 minute

तांका छंद- बक्सावाहा के जंगल

तांका छंद- बक्सवाहा के जंगल

*1*

क्यों काट रहे,
बक्सवाहा जंगल।
हीरे से पेड़,
कुछ करो शरम।
कुछ करो रहम।।
***

*2*

बदनसीबी पे,
बक्सवाहा जंगल।
आज है रोते।
राजनीति के बीज।
तुम क्यों रहे बोते।।
***

*3*

बने दुश्मन,
हीरे की लालच में।
अंधे होकर,
करते अमंगल।
काट रहे जंगल।।
***
***
*कवि- राजीव नामदेव “राना लिधौरी”*
संपादक- “आकांक्षा” पत्रिका
जिलाध्यक्ष-म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष-वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email – ranalidhori@gmail.com
Blog-rajeevranalidhori.blogspot.com

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