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तलाश

dr. pratibha prakash

dr. pratibha prakash

गज़ल/गीतिका

January 14, 2017

हाज़िर हूँ अपनी छोटी सी कोशिश के साथ

वक़्त वेवक्त चौक में दौड़ती थी जो शाम
अब हर रोज वही मैं शाम तलाशती हूँ

जो बस् गया मेरे वजूदो ज़हन ज़र्रा ज़र्रा
हर शहर हर गली में वो अक्स तलाशती हूँ

तोड़कर दीवारें मिटटी की बना लिये मकान
इन मकानों में छोटा सा एक घर तलाशती हूँ

तिल गुड़ के लड्डू और संग मूंगफली खाना
वो तिजारत और मोहब्बत तलाशती हूँ

कोई भी नहीं था अपना मोहहले में यकीन था
आज इन अपनों में मैं अपना तलाशती हूँ

मुफलसी में भी नसीब रईस हुआ करते थे
अब दौलत में भी वो सच्ची दौलत तलाशती हूँ

खो सा गया है हिन्दुस्तान दिखावे की होड़ में
अक्सर सोचती प्रतिभा आखिर क्या तलाशती हूँ

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Author
dr. pratibha prakash
Dr.pratibha d/ sri vedprakash D.o.b.8june 1977,aliganj,etah,u.p. M.A.geo.Socio. Ph.d. geography.पिता से काव्य रूचि विरासत में प्राप्त हुई ,बाद में हिन्दी प्रेम संस्कृति से लगाव समाजिक विकृतियों आधुनिक अंधानुकरण ने साहित्य की और प्रेरित किया ।उस सर्वोच्च शक्ति जसे ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु... Read more