कविता · Reading time: 1 minute

तलाश

था कभी एक समूह का हिस्सा //
अब अकेला सा हो गया हु //

था कभी पैदल, मंद बुद्धि सा मुसाफिर //
अब खुद की खोज मे निकल गया हु //

अबतो, ना तो समय का पता चलता, और ना ही हाल का //
इस जमाने से जरा कट-सा गया हु //

इरादे तो मज़बूत हैँ, मंजिल तक जाने के लिए //
अब एक अवसर की तलाश हैँ, कुछ कर दिखाने के लिए //

:~कविराज श्रेयस सारीवान

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