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*तलाश है जिनको* वे दोहन करें,

Dr. Mahender Singh

Dr. Mahender Singh

दोहे

November 12, 2017

***तलाश है जिनको,
वे दोहन करें,
जिनको कछु गयो भुलाय,
अपना तो तन-मन आतम है साथ में,
फिर कौन भेद !
महेंद्र रेल में है या फिर जेल में…!
.
चित्रण मेरे चरितार्थ है नहीं,
गर बोली जाये मिशाल !

सनातन मेरा नाम !
कहाँ कहाँ झूठ बुलंद है,
पकड़ी न जाये,

बिन जाने,
बिन जागे,
उकाब सबल है,

सूक्ष्म है,सवत: है,
कौन विवेक !
कौन अनुभव !
Mahender Singh Author

Author
Dr. Mahender Singh
(आयुर्वेदाचार्य) शौक कविता, व्यंग्य, शेर, हास्य, आलोचक लेख लिखना,अध्यात्म की ओर !
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