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तलाक

Rashmi Singh

Rashmi Singh

कविता

February 26, 2017

न उलझी थी
न सुलझी थी
जब हम प्रेम पाश में बंधे थे
की अब कोई प्रेम को प्यास न मानता
जब से ये तलाक पास आई है
तखय्युल करता है ये जीवन ख़िज़ा सा
की हर शामें आलम सी छाई है
और मलालें तन्हाई आई है।
#रश्मि

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Author
Rashmi Singh
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