May 16, 2020
कविता · Reading time: 1 minute

-: {{ तलब }} :-

न उससे पहले किसी की आरज़ू
न उसके बाद किसी की तलब होती है ,,

एक बार जो हो जाये किसी से मोहब्बत तो
ख़ुदा की इबादत भी इश्क़ के बाद होती है,,

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