तरुण जाग जाए

तरुण जाग जाए स्वराष्ट्र का, तब ही तो सचमुच विकास है |
जन जन के बंधुत्व रूप का उच्च भाल, उर का प्रकाश है |
उच्च सजगता का सुवास सह दिव्य प्रेम की सबल साधना
के बल से ही विश्व भूमि पर, आर्य देश, ज्ञानी अकाश है|
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बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए”एवं “कौंच सुऋषिआलोक” कृतियों के प्रणेता

वर्ष 2013 में मेरी प्रकाशित कृति “जागा हिंदुस्तान चाहिए” का मुक्तक

बृजेश कुमार नायक
26-04-2017

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