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तरुण जाग जाए

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

मुक्तक

April 26, 2017

तरुण जाग जाए स्वराष्ट्र का, तब ही तो सचमुच विकास है |
जन जन के बंधुत्व रूप का उच्च भाल, उर का प्रकाश है |
उच्च सजगता का सुवास सह दिव्य प्रेम की सबल साधना
के बल से ही विश्व भूमि पर, आर्य देश, ज्ञानी अकाश है|
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बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए”एवं “कौंच सुऋषिआलोक” कृतियों के प्रणेता

वर्ष 2013 में मेरी प्रकाशित कृति “जागा हिंदुस्तान चाहिए” का मुक्तक

बृजेश कुमार नायक
26-04-2017

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more
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