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तरसते नैना

त्रिदेव दुग्गल

त्रिदेव दुग्गल "अन्नू "

गज़ल/गीतिका

November 9, 2017

घुमड़ घुमड़ बरसते नैना !
देखन को तुम्हे तरसते नैना !

हो गए हैं कितने बावरे से ,
कभी रोते कभी हँसते नैना !

उछलते फिरते हैं खुशी से,
सुन तेरा नाम हर्षते नैना !

कैसे भूल जाऊँ मै तुमको
तुझमे ही मेरे बसते नैना !

तेरे प्यार में पागल होकर
यादों के जाल में फ़ंसते नैना !

“देव” कर कर याद तुमको
आठों पहर तड़फ़ते नैना !

___ त्रिदेव दुग़्गल “अन्नू”

Author
त्रिदेव दुग्गल
युवा कवि, गज़लकार एवं गीतकार गाँव व डाक- मुंंढाल खुर्द (भिवानी) सम्पर्क सूत्र-9992056777
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