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तभीआनंदित हृदयअविराम हो |

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

मुक्तक

April 6, 2017

जागरण दीपक बनो, सम्मान हो |
विचारों की सुगति की पहचान हो |
स्वयं को विकसित करो, निज तम हरो |
तभी आनंदित हृदयअविराम हो |

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “कौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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Author
बृजेश कुमार नायक
कोंच,जिला-जालौन (उ प्र) के बृजेश कुमार नायक साहित्य की लगभग सभी विधाओं के रचनाकार हैं |08मई 1961को ग्राम-कैथेरी(जालौन,उ प्र)में जन्में रचनाकार बृजेश कुमार नायक की दो कृतियाँ "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" प्रकाशित हो चुकी है |पूर्व राज्य... Read more
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