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तबाही का मंजर

sunil soni

sunil soni

कविता

March 1, 2017

हैराँ है धरती परेशां है अम्बर
बतला रहा है तबाही का मंजर ।
पापों की गर्मी से कांपे ये धरती
विष की घटा से ढँका है ये अम्बर ।।

किसी की हो करनी किसी को हो भरनी
बतला ही देता तबाही का मंजर ।
पछताओगे क्या ?अपने किये पर
अब खुद के ही सीने में खुद का है खंजर ।।

मानो भी सच को न मानोगे कब तक
झुठी ये दुनियां झूठा बबंडर ।
हम भी न होंगें तुम भी न होंगे
बनाते रहे गर हम धरती को बंजर ।।

हमारी हो श्र्द्धा हम विश्वास उनका
देखा है जिनने तबाही का मंजर ।
मानो न मानो तुम्हारी ख़ुशी है
देखेंगे हम भी तबाही का मंजर ।।

Author
sunil soni
जिला नरसिहपुर मध्यप्रदेश के चीचली कस्बे के निवासी नजदीकी ग्राम chhenaakachhaar में शासकीय स्कूल में aadyapak के पद पर कार्यरत । मोबाइल ~9981272637
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