दोहे · Reading time: 1 minute

तन मन धन

1
पंच तत्व से तन बना, उस मे ही मिल जाय
नहीं यहां से साथ में, कुछ भी ले जा पाय
2
सोता जब ये तन रहे,मन रहता गतिमान
सपनों के ही साथ मिल, ऊँची भरे उड़ान
3
अगर रहे बीमार तन,जीवन है लाचार
कोठी नौकर कार धन, सब लगते बेकार
4
जनमत के आधार पर, बात कही गर जाय
होती है मंजूर वो, काट न कोई पाय

29-11-2018
डॉ अर्चना गुप्ता

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डॉ अर्चना गुप्ता (Founder,Sahityapedia) "मेरी तो है लेखनी, मेरे दिल का साज इसकी मेरे बाद भी, गूँजेगी आवाज" माता- श्रीमती निर्मला अग्रवाल पिता- स्मृति शेष डॉ राजकुमार अग्रवाल शिक्षा-एम०एस०सी०(भौतिक शास्त्र),…
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