Skip to content

तन मन धन अर्पण करूं

Sharda Madra

Sharda Madra

मुक्तक

July 16, 2016

तन मन धन अर्पण करूं, ध्याऊँ तुझे नित श्याम
चरणों की चेरी बनकर, करूं सेवा निष्काम
छ्ल- कपट लोभ प्रपंच से सदा रहूँ मैं दूर
बन वृन्दा निधिवन की मैं, बसूँ वृन्दावन धाम

Author
Sharda Madra
poet and story writer
Recommended Posts
नमन करूं द्वार तेरे मै पावन
निर्मल हुआ है तन मन उज्ज्वल हुआ है जीवन चरणों मे जब मिली शरण मेरे जगत प्रभु रघुनंदन । सुखमय हुआ है अन्तर्मन हर सांस... Read more
हे भारत माँ
ये जमीं तेरी,येआँसमाँ तेरा,येआबोहवा,प्रकृति व जहाँ भी तेरा, येजीवन,तन,साँस,लहू और ये धड़कन भी तेरी तेरा तुझको क्या मैं अर्पण करूँ ? बस वादा है ये................ Read more
कोई बतलाए आख़िर क्या करूं मैं
कोई बतलाए आख़िर क्या करूं मैं छुपाऊँ क्या मैं ज़ाहिर क्या करूं मैं 'ब'बातिन हूँ मैं ग़म में चूर लेकिन बहुत खुश हूँ बज़ाहिर क्या... Read more
मैं अपने शब्दों से तेरी खूबसूरती कैसे बयां करूं
मैं अपने शब्दों से तेरी खूबसूरती कैसे बयां करूं, आईने की तरह तुझे अपने आगे शजा लिया क्या करूं, या फिर देवी की तरह तेरी... Read more