तन मन धन अर्पण करूं

तन मन धन अर्पण करूं, ध्याऊँ तुझे नित श्याम
चरणों की चेरी बनकर, करूं सेवा निष्काम
छ्ल- कपट लोभ प्रपंच से सदा रहूँ मैं दूर
बन वृन्दा निधिवन की मैं, बसूँ वृन्दावन धाम

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poet and story writer
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