गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

तन्हाई एक रूप अनेक

एक तन्हाई के अलग अलग अफसाने ,
कोई इसे सुकून तो कोई इसे दर्द माने ।

शायर हो या कोई फनकार के नजरिए से,
शाहकार को शक्ल मिले तन्हाई के बहाने ।

जो इश्क करते है खुदा से वो योगी/ फकीर ,
वो इसे प्रभु मिलन की राह में वरदान माने।

इल्म और किताबो से जो इश्क करते है वो,
ज्ञानी / विद्यार्थी तन्हाई को न हितेषी माने ।

तन्हाई प्रेमी जोड़ों का सुंदर संयोग बनाए,
तो कभी विरह के मारो को आए तरसाने।

तन्हाई का मौका उठाकर अधिकतर सभी ,
गुनाहगार लगते गुनाह की साजिश रचने।

तन्हाई रोगियों के लिए है एक बड़ी सजा,
रोग की पीड़ा ऐसे में उसे और लगे सताने ।

एक तन्हाई के कई रूप है और कई अफसाने ,
” अनु ” तन्हाई को आत्मसाक्षात्कार की राह माने ।

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